वो एक नामुराद औरत थी ! उसके एक बार नमूदार होते ही तबाही बरपा गयी थी ! वो कुछ भी कर सकती थी ! वो जादूगरनी थी ! एक अविस्मरणीय किरदार की अविस्मरणीय कहानी !
नया दिन नयी लाश (सुनील 63)
✍ Scribed by दिमाग की कारीगरी (रीटा सन्याल 1)
- Book ID
- 110578442
- Year
- 1977
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 89 KB
- Series
- सुनील #६३
- Category
- Fiction
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✦ Synopsis
वो एक वहशी दरिन्दा था जिसे कि कई खूबसूरत नौजवान लड़कियों की नृशंस हत्याओं के लिये जिम्मेदार ठहराया भी चुका था । अब वो फरार था तो क्या नया दिन नयी लाश का सिलसिला फिर शुरू होने वाला था ?
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हर कातिल की कोशिश होती है कि उसे कत्ल करते हुए कोई ना देख पाये । लेकिन इस कत्ल को स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शकों ने देखा था जिनमें कि सुनील भी शामिल था ! लेकिन फिर भी किसी को नहीं मालूम था का कि कत्ल किसने किया था ?
शहर के गैंगस्टर से सुनील की भिड़ंत की कहानी जिसमें उन्होंने सुनील को ऐसी चाल में फंसाया कि उसको पसीने आ गए ।
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कांसे की बनी हुई, एक हजार साल पुरानी नटराज की एक प्रतिमा चोरी चली गई । और साथ-साथ ही चोरी चले गये थे देश के एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान से सम्बंधित रहस्य । और अब सुनील का डबल मिशन था दोनों चीजों को ढूंढ निकालना ।
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