सिर्फ सनसनी फैलाने के लिये सुनील द्वारा छपाई गई एक मामूली खबर ने एक युवती को कई पार्टियों के आकर्षण का केंद्र बना दिया ! और अब हर पार्टी का केवल एक ही मकसद था - युवती का खात्मा या उस पर कब्जा ।
नौ जुलाई की रात (सुनील 78)
✍ Scribed by पाठक, सुरेन्द्र_मोहन
- Book ID
- 110576368
- Year
- 1980
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 71 KB
- Series
- सुनील #७८
- Category
- Fiction
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✦ Synopsis
एक ऐसी रात की कहानी जिसकी शहर के बड़े इज्जतदार और सम्भ्रान्त लोग लीपापोती करने की कोशिश कर रहे थे ।
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सुनील जानता था कि वह सीधा-सादा केस नहीं हो सकता था । वो ऐसा कोई केस था तो फिर उस खबर को अखबार वालों की पहुंच से बाहर रखने की कोशिश किसलिये ? और उस कोशिश में पुलिस की शिरकत किसलिये ?
एक बिजनेस डील के चक्कर में इकट्ठे हुए मेहमानों के बीच में कुछ ऐसा घटित हुआ कि सबका मानना था कि रमा ने अपने पति का खून किया था । लेकिन रमा को अपराधिनी मानना तो दूर, सुनील यह तक मानने को तैयार नहीं था कि उसका कत्ल हुआ था ।
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