गिरधारीलाल की खूबसूरत, जवान बीवी का मानना था कि उसके पति को जुये के खेल में ठगा जा रहा था । मदद के लिये आगे आये सुनील की टांग उस मामले में ऐसी फंसी कि साधारण जुए का खेल खून का खेल बन गया ।
अनोखी चाल (सुनील 77)
✍ Scribed by पाठक, सुरेन्द्र_मोहन
- Book ID
- 110576773
- Year
- 1979
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 89 KB
- Series
- सुनील #७७
- Category
- Fiction
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✦ Synopsis
शहर के गैंगस्टर से सुनील की भिड़ंत की कहानी जिसमें उन्होंने सुनील को ऐसी चाल में फंसाया कि उसको पसीने आ गए ।
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सिर्फ सनसनी फैलाने के लिये सुनील द्वारा छपाई गई एक मामूली खबर ने एक युवती को कई पार्टियों के आकर्षण का केंद्र बना दिया ! और अब हर पार्टी का केवल एक ही मकसद था - युवती का खात्मा या उस पर कब्जा ।
जुगल ने जब एक खूबसूरत लड़की की मदद करने की ठानी थी तो उसे नहीं पता था कि उसे स्मगलिंग में यूज किया जा रहा था । और जब उसे इस बात का अहसास हुआ तो बहुत देर हो चुकी थी और अब उसे आसरा था तो सिर्फ सुनील का ।
इन्स्पेक्टर प्रभूदयाल ने चौबीस घंटे के अंदर डकैती के गुनाहगारों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन जब डकैतों ने उस पर इल्जाम लगा डाला कि उसने डकैती की रकम का एक हिस्सा खुद डकार लिया था ।
घटना के समय एक नौजवान लड़की कोठी से भागती देखी गयी । पुलिस के अनुसार हत्यारी वही युवती थी लेकिन केवल सुनील जानता था कि उस युवती के अलावा एक अन्य औरत भी वहां मौजूद थी जिसकी चीखों से कि कोठी गूंज उठी थी ।
वो एक वहशी दरिन्दा था जिसे कि कई खूबसूरत नौजवान लड़कियों की नृशंस हत्याओं के लिये जिम्मेदार ठहराया भी चुका था । अब वो फरार था तो क्या नया दिन नयी लाश का सिलसिला फिर शुरू होने वाला था ?