शहर से बाहर से आए एक व्यापारी की टिप पर जब सुनील ने राजनगर में संचालित कॉलगर्ल्स के सुनियोजित रैकेट की तहकीकात की तो कई लोगों को ये बात रास नहीं आई ।
चोर सिपाही (सुनील 58)
✍ Scribed by पाठक, सुरेन्द्र_मोहन
- Book ID
- 110578201
- Year
- 1975
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 67 KB
- Series
- सुनील #५८
- Category
- Fiction
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✦ Synopsis
जुगल ने जब एक खूबसूरत लड़की की मदद करने की ठानी थी तो उसे नहीं पता था कि उसे स्मगलिंग में यूज किया जा रहा था । और जब उसे इस बात का अहसास हुआ तो बहुत देर हो चुकी थी और अब उसे आसरा था तो सिर्फ सुनील का ।
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