𝔖 Bobbio Scriptorium
✦   LIBER   ✦

Cover of ब्लो-अप (सुनील 84)

ब्लो-अप (सुनील 84)

✍ Scribed by पाठक, सुरेन्द्र_मोहन


Book ID
110610624
Year
1981
Tongue
Hindi
Weight
76 KB
Series
सुनील #८४
Category
Fiction

No coin nor oath required. For personal study only.

✦ Synopsis


इन्स्पेक्टर प्रभूदयाल ने चौबीस घंटे के अंदर डकैती के गुनाहगारों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन जब डकैतों ने उस पर इल्जाम लगा डाला कि उसने डकैती की रकम का एक हिस्सा खुद डकार लिया था ।


📜 SIMILAR VOLUMES


cover
✍ पाठक, सुरेन्द्र_मोहन 📂 Fiction 📅 1979 🌐 Hindi ⚖ 89 KB

शहर के गैंगस्टर से सुनील की भिड़ंत की कहानी जिसमें उन्होंने सुनील को ऐसी चाल में फंसाया कि उसको पसीने आ गए ।

अपने कत्ल की सुपारी
✍ वेद प्रकाश शर्मा 📂 Fiction 📅 2015 🌐 Hindi ⚖ 3 MB

वो हालात की भंवर मे फँसा एक मासूम इंसान था. जिसे जिंदगी की चाहत से ज़्यादा अपनो की फ़िक्र थी और जब अपनो पर आने वाली मुसीबत की उसने कल्पना की तो उसे उन्हे बचाने की सिर्फ़ एक ही राह नज़र आई और उसने दे दी.... अपने कत्ल की सुपारी

cover
✍ पाठक, सुरेन्द्र_मोहन 📂 Fiction 📅 1978 🌐 Hindi ⚖ 69 KB

ट्रिप्पल मर्डर की ससनिखेज दास्तान जिसमें पहली लाश सुनील के फ़्लैट से बरामद हुई और ऐसी ढीठ साबित हुई कि टाले न टली !

cover
✍ पाठक, सुरेन्द्र_मोहन 📂 Fiction 📅 1975 🌐 Hindi ⚖ 63 KB

सभ्य लोगों की असभ्य हरकतों की सनसनीखेज दास्तान जिसमें धोखा-दर-धोखा अहमतरीन किरदार की तरह शामिल था और जिसमें सुनील खिचड़ी में घी की तरह घुला-मिला हुआ था । एक सदाबहार मर्डर मिस्ट्री ।

cover
✍ पाठक, सुरेन्द्र_मोहन 📂 Fiction 📅 1978 🌐 Hindi ⚖ 70 KB

राजनगर शहर के दो धूर्त, भ्रष्टाचारी, और रिश्वतखोर राजनीतिबाजों की एक-दूसरे को धता बताने की, छकाने की जद्दोजहद में जब अचानक ब्लास्ट के रिपोर्टर सुनील की टांग जा फंसी तो जलजला तो आना ही था !

cover
✍ पाठक, सुरेन्द्र_मोहन 📂 Fiction 📅 1975 🌐 Hindi ⚖ 67 KB

जुगल ने जब एक खूबसूरत लड़की की मदद करने की ठानी थी तो उसे नहीं पता था कि उसे स्मगलिंग में यूज किया जा रहा था । और जब उसे इस बात का अहसास हुआ तो बहुत देर हो चुकी थी और अब उसे आसरा था तो सिर्फ सुनील का ।