हालात ने कुछ ऐसी करवट बदली थी कि विमल को अपने जीवन के उद्देश्य और अस्तित्व पे ही सवालिया चिन्ह नजर आया । लेकिन उसके प्रारब्ध को शायद कुछ और ही मंजूर था । जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां!
Sher Savaari (Vimal Book 34) (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Year
- 2001
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 136 KB
- Series
- विमल #३४
- Category
- Fiction
- ASIN
- B085C66X7Y
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✦ Synopsis
"अनजाने में शेर सवारी कर बैठा हूं; अब न चढ़ते बनता है, न उतरते बनता है । चढा रह नहीं सकता, उतरूंगा तो शेर खा जाएगा ।"
क्या शेर का निवाला बनना ही विमल की नियति है?
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