हालात ने कुछ ऐसी करवट बदली थी कि विमल को अपने जीवन के उद्देश्य और अस्तित्व पे ही सवालिया चिन्ह नजर आया । लेकिन उसके प्रारब्ध को शायद कुछ और ही मंजूर था । जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां!
Ishtihari Mujrim (Vimal Book 3) (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Year
- 1976
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 70 KB
- Series
- विमल #०३
- Edition
- 2018
- Category
- Fiction
- ASIN
- B07L1C61DF
No coin nor oath required. For personal study only.
✦ Synopsis
विमल की तलाशी में पुलिस को रिवॉल्वर और नोट बरामद हुए और फिर विमल के हाथों में हथकड़ियां ! विमल ने सोचा खेल खत्म । क्या सचमुच ?
📜 SIMILAR VOLUMES
जिंदगी उसी का साथ देती है जिसको जिंदगी का मोह न सताता हो । जो मौत से पंजा को सदा तैयार रहता हो । हरदिल अजीज सोहल की जिंदगी का फलसफा
"अनजाने में शेर सवारी कर बैठा हूं; अब न चढ़ते बनता है, न उतरते बनता है । चढा रह नहीं सकता, उतरूंगा तो शेर खा जाएगा ।" क्या शेर का निवाला बनना ही विमल की नियति है?
अपने अंजाम से बेखबर जहाज के पंछी ने जब खबरदार शहरी बन कर पूरे शहर का मुहाफिज बन दिखाया तो जैसे एक जलजला सा आ गया, जिससे शहर का कोई भी बाशिंदा अछूता ना रह पाया ।
"उसके सिर पर दशमेश पिता का हाथ है । वो काल पर फतह पाया, पीर-पैगम्बरों जैसी सलाहियात वाला मायावी है । उसके हजार हाथ हैं । वो अकेला ही सवा लाख है ।" ये थे विमल के दुश्मनों के उसके प्रति उद्गार
ये 'खेल' नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है क्या विमल आग का दरिया पार कर सका?