ठाकुर जोरावर सिंह की कलाकृतियों के संग्रह को देखने आया हवेली का एक मेहमान जब अचानक गायब हो गया तो सबका मानना था कि वो हवेली के भुतहा माहौल और प्रेतलीला से डरकर भाग गया था । लेकिन सुनील सबसे सहमत नहीं था ।
झूठी गवाही (सुनील 83)
✍ Scribed by पाठक, सुरेन्द्र_मोहन
- Book ID
- 110610337
- Year
- 1981
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 82 KB
- Series
- सुनील #८३
- Category
- Fiction
No coin nor oath required. For personal study only.
✦ Synopsis
होलकर परिवार की डूबती नैया बचाने के लिए सुनील ने कई हैरतंगेज कारनामे कर दिखाए ! उनमें से पहला ये था कि उसने साबित कर के दिखाया कि की उनके खिलाफ दी गयी गवाही झूठी थी !
📜 SIMILAR VOLUMES
वो एक नामुराद औरत थी ! उसके एक बार नमूदार होते ही तबाही बरपा गयी थी ! वो कुछ भी कर सकती थी ! वो जादूगरनी थी ! एक अविस्मरणीय किरदार की अविस्मरणीय कहानी !
एक मामूली तस्वीर की रोमांचक कहानी जिसका अस्तित्व कई लोगों के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया ।
जुगल ने जब एक खूबसूरत लड़की की मदद करने की ठानी थी तो उसे नहीं पता था कि उसे स्मगलिंग में यूज किया जा रहा था । और जब उसे इस बात का अहसास हुआ तो बहुत देर हो चुकी थी और अब उसे आसरा था तो सिर्फ सुनील का ।
हर कातिल की कोशिश होती है कि उसे कत्ल करते हुए कोई ना देख पाये । लेकिन इस कत्ल को स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शकों ने देखा था जिनमें कि सुनील भी शामिल था ! लेकिन फिर भी किसी को नहीं मालूम था का कि कत्ल किसने किया था ?