𝔖 Bobbio Scriptorium
✦   LIBER   ✦

Cover of मैं मन हूँ: Main Mann Hoon (Hindi Edition)

मैं मन हूँ: Main Mann Hoon (Hindi Edition)

✍ Scribed by Deep trivedi


Publisher
Deep trivedi
Year
2016
Tongue
Hindi
Weight
157 KB
Edition
Second
Category
Fiction
ISBN
9384850136

No coin nor oath required. For personal study only.


📜 SIMILAR VOLUMES


Main Aparadhi Janm Ka/मैं अपराधी जन्म का
✍ पाठक, सुरेन्द्र मोहन 📂 Fiction 📅 2021 🏛 Penguin Random House India Private Limited 🌐 Hindi ⚖ 242 KB

वो मर्द नहीं जो डर जाए, माहौल के ख़ूनी मंज़र से, उस हाल में जीना लाज़िम है, जिस हाल में जीना मुश्किल है। “वक्त बड़े-बड़े ग़म भुला देता है,” ऐसा न हो तो जीना जहन्नुम बन जाए; हर कोई जीते-जी मर जाए; फिर न भूल कि तू सोहल है; वो सोहल है; जिसका नाम सुनकर दुश्मन काँप जाते हैं; तू सामने पड़ जाए; तो कलेजा था

माया: Maya (Marathi Edition)
✍ विक्रम भागवत, Vikram Bhagwat 📂 Fiction 📅 2020 🏛 Self Published 🌐 mr-IN ⚖ 92 KB
आखिरी मकसद
✍ सुरेन्द्र मोहन पाठक 📂 Fiction 📅 1990 🌐 Hindi ⚖ 126 KB

कहते हैं दुनिया में हर किसी का कहीं न कहीं कोई न कोई डबल होता है । सुधीर कोहली की बदकिस्मती से उसका डबल दिल्ली में ही निकल आया । दोनों में से एक का मरना लाजमी था ।

Grandmaster (Hindi) (Hindi Edition)
✍ Pathak, Surender Mohan 📂 Fiction 📅 2007 🌐 Hindi ⚖ 175 KB 👁 1 views

एक सौंदर्य की देवी की आसमान छूती महत्वाकांक्षाओं की दहशतनाक दास्तान जो एक ऐसे शख्स से मुकाबिल थी जो घात प्रतिघात के खेल का शातिर खिलाड़ी था ।

Conman (Hindi) (Hindi Edition)
✍ Pathak, Surender Mohan 📂 Fiction 📅 2018 🏛 Westland 🌐 Hindi ⚖ 226 KB 👁 1 views

वो एक सजीला नौजवान था, जिसे भ्रम का जाल फैलाने में महारथ हासिल थी, एक ऐसा जाल जिसमें खूबसूरत लड़कियां खुद फंसने को उतावली हो उठती थीं । वो कॉन के गेम का एक शातिर खिलाड़ी था । ऐसे कॉनमैन को अगर एक रात उसकी जिंदगी ने ही कॉन कर दिया तो फिर क्या अचरज!

Kaala Naag/काला नाग (Hindi Edition)
✍ पाठक, सुरेन्द्र मोहन 📂 Fiction 📅 2019 🏛 Penguin Random House India Private Limited 🌐 Hindi ⚖ 195 KB 👁 1 views

वह एक पुलिस अफ़सर था। एक थाने का थाना प्रभारी जो ज़ाती रंजिश के तहत अपने मातहत ऑफिसर के पीछे पड़ा हुआ था। उसके पंगेजी मिजाज़ का ये आलम था कि वो खुद को ‘काला नाग’ कहता था जिसका काटा पानी नहीं मांगता था ।