वो मर्द नहीं जो डर जाए, माहौल के ख़ूनी मंज़र से, उस हाल में जीना लाज़िम है, जिस हाल में जीना मुश्किल है। “वक्त बड़े-बड़े ग़म भुला देता है,” ऐसा न हो तो जीना जहन्नुम बन जाए; हर कोई जीते-जी मर जाए; फिर न भूल कि तू सोहल है; वो सोहल है; जिसका नाम सुनकर दुश्मन काँप जाते हैं; तू सामने पड़ जाए; तो कलेजा था
Zameer Ka Qaidi (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Publisher
- HarperCollins Publishers India
- Year
- 2005
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 219 KB
- Series
- विमल #३६
- Category
- Fiction
- ISBN
- 9352643690
- ASIN
- B01N5NFWKD
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✦ Synopsis
वो एक दोस्त था जिसने विमल से नहीं उसके जमीर से एक फरियाद की । एक दोस्त की पुकार पे अपनी जान हथेली पे लेकर निकल पड़े सोहल की हाहाकारी कहानी ।
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कुछ ऐसे थे कल तक सोहल से खौफ खाए अंडरवर्ल्ड के बड़े महंतों के नापाक और हौलनाक इरादे जो सोहल लिए ही नहीं, उसके तमाम मोहसिनों के वजूद के लिए खतरा बन गए ।
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