भरे-पूरे होटल में दिन-दहाड़े, अनेकों चश्मदीद गवाहों की मौजूदगी में हुई एक हत्या को जब कातिल ने डकैती का जामा पहना डाला । लेकिन ये शायद कातिल का दुर्भाग्य ही था कि उन गवाहों में एक ब्लास्ट का रिपोर्टर सुनील भी था ।
Samudra Me Khoon (Sunil Book 2) (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Book ID
- 100446396
- Year
- 1964
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 53 KB
- Series
- सुनील #०२
- Edition
- 2019
- Category
- Fiction
- ASIN
- B07R7DY2WR
No coin nor oath required. For personal study only.
✦ Synopsis
दीनानाथ और मुरलीधर लोगों को जुआ खिला खिला कर अपनी जेबें भरते थे । हारे हुए जुआरियों से पूरा पैसा ऐंठने के लिये वो उन्हें प्रोनोट लिखवाकर जुए के लिये उधार तक देने गुरेज नहीं करते थे । एक दिन मुरलीधर की गोली बिंधी लाश उसके अपने ही ऑफिस से बरामद हुई और पुलिस का मानना था कि ऐसे ही किसी प्रोनोट के शिकार ने उसका काम तमाम किया था ।
📜 SIMILAR VOLUMES
बदकिस्मती से कुछ बदमाशों की एक कत्ल को एक्सीडेंट का रूप देने की करतूत का सुनील चश्मदीद गवाह बन गया । अब उनको अपनी और अपने बॉस की सलामती सिर्फ इसी बात में नजर आती थी कि वे सुनील को रास्ते से हटा पाते !
एक अजीबोगरीब वसीयत द्वारा छोड़ी गयी विरासत को जब उसके वारिस ने काबू में करने की कोशिश की तो एक के बाद एक कत्ल होने शुरू हो गये । आखिर कौन था वो कातिल जिसका कि मूल मन्त्र था एक खून और, एक खून और !
पाकिस्तानी इंटेलिजेंस का एक महत्वपूर्ण ऑफिसर कर्नल मकसूद अहमद भारत को डिफेक्ट करना चाहता था । सीधे-सादे लगने वाले इस मिशन के लिये सुनील को चुना गया था । लेकिन क्या ये मिशन इतना ही सीधा साबित होने वाला था ?
देश के गुप्त रहस्यों के चक्कर में पड़े जासूसों के आपसी टकराव की एक हंगामाखेज कहानी ।
देश के अत्यन्त गोपनीय रहस्य से सम्बन्धित कुछ कागजात न केवल प्रतिरक्षा मन्त्रालय से गायब हो गए बल्कि एक मामूली व्यक्ति की जेब से तब बरामद हुए जब कि उसका मृत शरीर रेलवे लाइन पर पड़ा पाया गया ।