पाकिस्तानी इंटेलिजेंस का एक महत्वपूर्ण ऑफिसर कर्नल मकसूद अहमद भारत को डिफेक्ट करना चाहता था । सीधे-सादे लगने वाले इस मिशन के लिये सुनील को चुना गया था । लेकिन क्या ये मिशन इतना ही सीधा साबित होने वाला था ?
London Me Hangama (Sunil Book 28) (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Book ID
- 110578252
- Year
- 1969
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 55 KB
- Series
- सुनील #२८
- Category
- Fiction
- ASIN
- B07W4RDB7P
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✦ Synopsis
देश के गुप्त रहस्यों के चक्कर में पड़े जासूसों के आपसी टकराव की एक हंगामाखेज कहानी ।
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देश के अत्यन्त गोपनीय रहस्य से सम्बन्धित कुछ कागजात न केवल प्रतिरक्षा मन्त्रालय से गायब हो गए बल्कि एक मामूली व्यक्ति की जेब से तब बरामद हुए जब कि उसका मृत शरीर रेलवे लाइन पर पड़ा पाया गया ।
भरे-पूरे होटल में दिन-दहाड़े, अनेकों चश्मदीद गवाहों की मौजूदगी में हुई एक हत्या को जब कातिल ने डकैती का जामा पहना डाला । लेकिन ये शायद कातिल का दुर्भाग्य ही था कि उन गवाहों में एक ब्लास्ट का रिपोर्टर सुनील भी था ।
दीनानाथ और मुरलीधर लोगों को जुआ खिला खिला कर अपनी जेबें भरते थे । हारे हुए जुआरियों से पूरा पैसा ऐंठने के लिये वो उन्हें प्रोनोट लिखवाकर जुए के लिये उधार तक देने गुरेज नहीं करते थे । एक दिन मुरलीधर की गोली बिंधी लाश उसके अपने ही ऑफिस से बरामद हुई और पुलिस का मानना था कि ऐसे ही किसी प्रोनोट के शिकार
चार लुटेरे अपनी योजना हर कदम पर आती कठिनाइयों के बावजूद माल लूटने में कामयाब हो तो गए । लेकिन फिर उनकी लूट की खीर में ब्लास्ट के रिपोर्टर सुनील चक्रवर्ती के रूप में जैसे मक्खी पड़ गई !
वो एक मामूली-सा एक्सीडेंट था जिसमें बीमा कम्पनी हरजाना तक भरने को तैयार थी । लेकिन फिर सुनील की उस मामले में ऐसी टांग उलझी कि वो मामूली-सा मामला रहस्य और पेचीदियों का घर बन गया ।