फाकाकशी करते विमल को जब शान्ता ने एक आसरा, एक सहारा ऑफर किया तो विमल को लगा जैसे उसके अच्छे दिन वाले थे । लेकिन विमल नहीं जानता था कि शान्ता ने उसे आसरा नहीं दिया था बल्कि अपने लिये एक हथियार ढूंढा था । एक ऐसा हथियार जिसे चलाकर वो अपने सारे कष्ट दूर करना चाहती थी । अपनी सैलाब जैसी जिंदगी में ठहराव त
Maut Ka Naach (Vimal Book 13) (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Year
- 1984
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 132 KB
- Series
- विमल #१३
- Edition
- 2020
- Category
- Fiction
- ASIN
- B084JLFFZV
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✦ Synopsis
एक ऐसी गाथा जिसका शब्दों में वर्णन असंभव है । एक ऐसी गाथा जिसने सुरेन्द्र मोहन पाठक को हिंदी उपन्यासकारों का अविवादित सिरमोर बना दिया । बखिया पुराण का दूसरा अध्याय ।
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भाग्य की कैसी विडम्बना थी कि छः राज्यों में घोषित इश्तिहारी मुजरिम, कई हत्याओं के लिए जिम्मेदार विमल एक ऐसे अपराध की एवज में पकड़ा गया था जो उसने किया नहीं था ।
परोपकार की भावना ने ना केवल विमल की जिंदगी का दुर्लभ ठहराव छीन लिया था बल्कि उसे जिंदगी के एक ऐसे मोड़ पे ला खड़ा किया था जहाँ से हर रास्ता मौत की तरफ जाता था ।
ये 'खेल' नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है क्या विमल आग का दरिया पार कर सका?
एक पीड़ित लड़की की हमलावर बांह की फरियाद सुनकर विमल निर्लिप्त ना रह पाया । शीघ्र ही उसने खुद को जहाज के पंछी की भांति अपनी गुनाह से पिरोई जिंदगी के रूबरू पाया ।
जिंदगी में ठहराव और सुकून की खोज में विमल ने जैसे तैसे करके एक नया चेहरा तो हासिल कर लिया, पर क्या वो चेहरा उसे कोई सुकून दिला पाया ? या एक बार फिर उसकी किस्मत ने अपना खेल दिखा दिया ?