वह एक पुलिस अफ़सर था। एक थाने का थाना प्रभारी जो ज़ाती रंजिश के तहत अपने मातहत ऑफिसर के पीछे पड़ा हुआ था। उसके पंगेजी मिजाज़ का ये आलम था कि वो खुद को ‘काला नाग’ कहता था जिसका काटा पानी नहीं मांगता था ।
Khaali Makan (Hindi Edition)
✍ Scribed by Pathak, Surender Mohan
- Year
- 1983
- Tongue
- Hindi
- Weight
- 159 KB
- Series
- थ्रिलर
- Category
- Fiction
- ASIN
- B0844VSPND
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✦ Synopsis
डबल मर्डर की एक पेचीदी, मकड़ी के जाले की तरह उलझी दास्तान, जो इन्स्पेक्टर प्रभुदयाल के लिए स्वयं उसके सृजनकर्ता का चैलेंज थी ।
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